हाथ से बनाया हुआ कागज का उद्योग PDF  | Print |  E-mail
हाथ कागज उद्योगः

कागज एवं कागज का बोर्ड बनाने हेतु बाँस वुडग्रास, चावल एवं गेहँ का पुआल,पटसन, फटा एवं रद्दी कागज जैसे कच्चे माल आसानी से उपलब्ध हो जाते है। भारतीय लुगदी एवं कागज उद्योग ने वर्तमान में हाथ कागज पर एम्ब्रोडरी जैसी मूल्यवर्धित गतिविधियों के कारण व्यापक वृद्धि की है। जयपुर के नजदीक एक गाँव में विश्व का सबसे बड़ा हाथ कागज का केन्द्र है। भारत में हाथ कागज उद्योग पर्यावरणीय दृष्टि से कागज उत्पाद की मांग बढ़ाने हेतु विचारणीय संभावना प्रदान करता है। दिल्ली इन दोनों मालों की प्राप्ति हेतु आदर्श स्थान है क्योंकि यहाँ लुगदी व्यवसाय पनप रहा है जो पुराने कपड़े एवं रद्दी कागज की विशाल मात्रा को समृद्धि प्रदान करता है। हाथ कागज के उत्पादन में कम पूँजी का विनिवेश होता है। इससे स्थानीय उद्यमिता की प्रोन्नति होती है। इससे अधिक से अधिक स्थानीय रोजगार का सृजन होता है। यह कागज कारखानों की तुलना में कम संसाधनों का उपयोग तथा प्रदुषण कम करने के कारण पर्यावरणीय दृष्टि से सही तकनीकी है ।

इससे विशेष प्रकार के कागज जैसे वाटरमार्क, फिल्टर पेपर तथा ड्राविंग शीट आदि का उत्पादन किया जा सकता है। हाथ कागज एवं कारखाना निर्मित कागज की लागत में कम (मार्जिनल) अन्तर होता है। वनो के लुप्त होने, कागज की मात्रा में नयी जागरूकता की दृष्टि से कागज बनाने के मात्र विशेषतः लुगदी एवं फाइबर के बारे में नये अध्ययन का सृजन करना चाहिए।

भारत सरकार खादी और ग्रामोद्योग आयोग जैसे विभिन्न हाथ कागज प्रदायक परिषद को निधि प्रदान करता है, जो बैंक से सहबद्ध होती है तथा हाथ कागज का व्यवसाय आरंभ करने वाले उद्यमियों को बैंक के माध्यम से निधि प्रदान किया जाता है। सात वर्ष पूर्व यू.एन.डी.पी ने हाथ कागज उद्योग में गतिविधियों के सुधार हेतु निधि प्रदान की, जिससे उस बाजार को अनेक एक्सपोजर मिला। भारत सरकार ने भी ग्रा.रो.सृ.कार्यक्रम आरंभ की जहाँ सरकार द्वारा ग्रामीण लोगों को लघु हाथ कागज इकाईयों को आरंभ करने के लिए ऋण दिया। भारत ने ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 10,000 व्यक्तियों को पूर्णकालिक रोजगार प्रदान कर कुल रू.21.00 करोड़ का उत्पादन किया। बाद में खादी और ग्रामोद्योग आयोग के क्षेत्र में उद्योग को बढ़ाने हेतु राष्ट्रीय स्तर पर क्रेता-बिके्रता मेल सह प्रदर्शनी, हाथ कागज संबंधी संगोष्ठी सह कार्यशाला आदि जैसे अन्य प्रमुख कार्यक्रमों का आयोजन किया।

इसके अलावा मुंबई, असम, दिल्ली में हाथ कागज बनाने का बहु अनुशासनिक प्रशिक्षण केन्द्र शुरू की गई, जो उच्च गुणवत्ता उत्पाद हेतु डेमोन्स्ट्रेशन कीट तथा प्राकृतिक रूप से उपलब्ध स्थानीय कच्चा माल को कैसे टैव  किया जाय, से संभावित उद्यमी प्रदान करता है उत्तर पूर्वी क्षेत्र में हाथ कागज उद्योग को बढ़ावा देने हेतु उत्तर पूर्वी राज्यों में इस प्रकार की गतिविधियों के आयोजन हेतु योजना बनाते है। इस वर्ष खादी और ग्रामोद्योग आयोग क्षेत्र की दो प्रमुख ईकाइयों ”द स्थानेश्वर हैण्डमैड पेपर पी.सी.आई.सी लिमिटेड“ तथा ”हैण्ड मैड पेपर व बोर्ड उद्योग“ ने सर्वोच्च गुणवत्ता उत्पाद की आपूर्ति हेतु भारत के राष्ट्रपति के माध्यम से राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। श्री के. सुधाकर उप निदेशक प्रभारी (हाथ कागज एवं फाइबर उद्योग) का विचार है कि ‘‘हाथ कागज उत्पाद सृजनात्मक, नवीन एवं विचारों से पूर्ण वास्तविक कोष है तथा मूल्यवर्धन एवं निर्यातोन्मुख संभावना के कारण इस उद्योग को उत्कृष्ट भविष्य प्राप्त हुआ है।’’ इस क्षेत्र ने पैकेजिंग उद्योग अर्थात मेडिकल पैकेजिंग अथवा खाद्य पैकेजिंग हेतु बहुत बड़ा क्षेत्र तैयार किया है। यहाँ तक कि ‘‘पेपरेक्स’’ जैसे अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड मेला व्यापार संबंधी गतिविधियों के प्रोत्साहन हेतु लाभदायक है। इस वर्ष ”पेपरेक्स 2005’’ में कार्लटोन कोट प्राइवेट लिमिटेड ने केवल प्रथम पुरस्कार जीता था। भारत की प्रत्येक इकाई को कुल रू.50 करोड़ का कच्चा माल प्रदान किया गया। इसमें से अधिकांश इकाईयाँ पूर्णतः निर्यातान्मुखी हो चुकी है। हाथ कागज हेतु सदैव बढ़ने वाला अंतर्राष्ट्रीय बाजार इंडोनिशिया मलेशिया तथा फिलिपीन देशों में ”हैण्डमैड पेपर जियांट“ के रूप में पहले ही विकसित हो चुका है। भारत में अधिकतम वृद्धि की संभावना देखी जा रही है। भारत हाथ कागज के अधिकांश प्रकारो के विनिर्माण में सदैव स्व-पर्याप्त (यथेष्ट) है। भारतीय हाथ कागज एवं इसके उत्पादों के लिए विशेषकर अमेरिका,पश्चिमी,जर्मनी,यूरोपियन देशों आस्ट‘ेलिया आदि जैसे विकसित देशों में निर्यात बाजार की अद्भूत वृद्धि हुई है। अंतिम दशक निर्यात में अनवरत वृद्धि का दशक रहा है क्योंकि अनेकों हाथ कागज एवं कागज उत्पाद विनिर्माता इकाईयाँ सौ प्रतिशत निर्यातोन्मुखी इकाईयाँ बन चुकी है तथा देश का विदेशी विनियम बढ़ाने में सहायता प्रदान की है।

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