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हमारे देश में पॉमगुड उद्योग अतिप्राचीन परंपरागत ग्रामीण उद्योग है।
विशेषकर समाज के कमजोर वर्ग के हजारों ग्रामीण बेरोजगार युवकों को रोजगार का अवसर प्रदान करने के लिए पॉमगुड का उत्पादन तथा संबद्ध पॉम उत्पादों हेतु करोडों पॉम वृक्षों का दोहन किया जा सकता है।
यह संगठन प्रमुख समाजों की उत्पादन गतिविधियाँ का समन्वय, कारीगरों को प्रशिक्षण, औजार/उपकरण प्रदान करना, बैंक से वित्त की व्यवस्था, कारीगरों द्वारा उत्पादित पॉमगुड तथा पॉम उत्पादों के लिए विपणन सहायता प्रदान कर रहा है।
पॉम वृक्ष से अनेको उपयोगी एवं सजावट के सामान तैयार किये जाते है। इसमें से अधिकांश उत्पाद ग्रामीण क्षेत्रों तथा मेट‘मेट्रोपोलिटिन शहरों में कारीगरी मूल्य तथा अत्यधिक विपणन संभावना के साथ आकर्षक होता है।
विविध पॉम उत्पादों की उपयोगिता तथा खाद्य मूल्य पर विचार करते हुए, बाद में वृद्धि एवं विकास हेतु इसकी विशाल संभावना/क्षेत्र है। पॉमगुड उद्योग की गतिविधियों को सुदृढ़ अथवा बढ़ा कर, ग्रामीण जनता का शहर में जाने से रोका जायेगा।
ग्रामीण क्षेत्र में ग्रामीण अर्थव्यवस्था बढाने तथा विशाल रोजगार का सृजन करने के लिए इस उद्योग की वृद्धि करना पूर्णतः आवश्यक है। पॉम उद्योग सभी प्रकार से संवर्धनात्मक सहायता प्रदान करता है। अतः यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
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