गुड एवं खांडसारी उद्योग PDF  | Print |  E-mail

गुड एवं खांडसारी उद्योग

चूँकि, पूरे भारत में गन्ना की खेती होती है,इसलिए गुड एवं खांडसारी उद्योग के विकास हेतु विशाल क्षेत्र है। खादी और ग्रामोद्योग आयोग के अंतर्गत गुड एवं खांडसारी उद्योग गन्ना के पूरे उपयोग को सुनिश्चित करने में मदद करता है।

आयोग की योजनाएं बाजार में उपलब्ध तकनीकी रूप से परीक्षित तथा सर्वोच्च कोटि के गन्ना क्रशर के लिए ही केवल आर्थिक सहायता करती है।

 

गुड एक ऐसा उत्पाद है जिसका अधिकांश उपयोग भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में चीनी के बदले मीठा के रूप में किया जाता है।

इसमें उद्यमी उत्पादन का 10-15 प्रतिशत लाभ कर सकता है। इसमें उद्यमी को अन्य अप्रत्यक्ष लाभ भी होता है।

1) निम्न लागत पर उच्चतम खाद्य मूल्य

2) आवश्यक उपकरण आसानी से प्राप्त हो सकता है।


ग्रामीण क्षेत्र में गुड एवं खांडसारी की अधिक मांग होने के कारण इसे स्थानीय हॉट एवं दुकानों में बेंचा जा सकता है।


बडे पैमाने पर गन्ना की आपूर्ति इसकी मुख्य आवश्यकता है । इसकी आपूर्ति या तो बाजार से अथवा उद्यमी द्वारा उत्पादन कर की जा सकती है।

पूरे वर्ष बीज खरीदने तथा गन्ना स्टोर करने के लिए पर्याप्त कार्यशील पूँजी की आवश्यकता पडती र्है

इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनेको सहायता पद्धति उपलब्ध है। उनमें से खादी और ग्रामोद्योग आयोग योजना एक है,जो क्रशर उपलब्ध कराने हेतु बनायी गयी है।