खादी और ग्रामोद्याग आयोगके बारे में


खादी और ग्रामोद्याग आयोग संसद के एक अधिनियम(१९५६ के ६१ वें तथा १९८७ के अधिनियम १२ एवं२००६ के अधिनियम १० के द्वारा सृजित विधिविहित संगठन हैं| अप्रैल १९५७ में स्थापित इसने अखिल भारत खादी और ग्रामोद्योग मंडल से कार्यभार हाथ में लिया | यह संगठन सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम मंत्रालय ,भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत हैं|

उद्देश्यः

आयोग ने मुख्य रूप से निम्नलिखित व्यापक उद्देश्य निर्धारित किया है:
  • रोजगार प्रदान करने का सामाजिक उद्देश्य।.
  • बिक्री योग्य वस्तुओं का उत्पादन करने का आर्थिक उद्देश्य, और.
  • जनता में आत्मनिर्भरता एवं सुदृढ़ ग्राम स्वराज की भावना पैदा करने का व्यापक उद्देश्य।.

कार्यः

आयोग के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैः
  • ग्रामीण विकास में लगे अन्य अभिकरणों से समन्वय स्थापित कर ग्रामीण क्षेत्रों में खादी और अन्य ग्रामोद्योग के विकास के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाते हुए इसे संबंर्धित,संगठित तथा कार्यान्वित करना।
  • इसके कार्यो के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग में लगे कारीगरों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन तथा उनमें सहयोगात्मक प्रयास की भावना उत्पन्न करने के अलावा, उत्पादकों की आपूर्ति हेतु कच्चा माल एवं औजारों के संग्रह को बढाना, अनिर्मित माल के रूप में कच्चा माल के प्रशोधन हेतु सामान्य सेवा सुविधा का सृजन तथा खादी और ग्रामोद्योगी उत्पादों के विपणन हेतु सुविधा का प्रावधान शामिल है। खादी और/अथवा ग्रामोद्योगी उत्पाद अथवा हस्तकलाओं की बिक्री एवं विपणन की प्रोन्नति हेतु आयोग जहाँ भी संभव एवं आवश्यक हो,स्थापित विपणन अभिकरणों से संपर्क कर सकता है।
  • उत्पादकता बढ़ाने,श्रम को कम करने एवं उनकी स्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने एवं ऐसे अनुसंधान से प्राप्त प्रमुख परिणामों के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था करने की दृष्टि से गैर-परंपरागत ऊर्जा एवं विद्युत ऊर्जा के उपयोग के साथ-साथ खादी और ग्रामोद्योगी क्षेत्र में उपयोग लायी जा रही उत्पादन तकनीकी एवं औजारों में अनुसंधान को प्रोत्साहित एवं संवर्धित करने तथा इससे संबंधित समस्याओं के अध्ययन की सुविधा प्रदान करने का उत्तरदायित्व आयोग पर है।
  • आयोग खादी और ग्रामोद्योगों के विकास एवं कार्यान्वयन हेतु संस्थाओं तथा व्यक्तियों को वित्तीय सहायता प्रदान करता तथा डिजाईन की आपूर्ति, प्रोटोटाइप तथा अन्य तकनीकी सूचना के माध्यम से उनका मार्गदर्शन करता है।
  • खादी और ग्रामोद्योगी गतिविधियों को क्रियान्वित करने में, आयोग उत्पादों की वास्तविकता एवं गुणवत्ता मानक तथा मानक के अनुरूप उत्पादों को सुनिष्चित करता है।
  • आयोग खादी और ग्रामोद्योगों के विकास हेतु प्रमुख परियोजनाओं के अनुसंधान अथवा तैयार करने के अलावा, संबंधित खादी और/अथवा ग्रामोद्योगी समस्याओं का प्रत्यक्ष रूप से अथवा अन्य अभिकरणों के माध्यम से अध्ययन करता है।
  • आयोग अपनी गतिविधियों से संबंधित किसी अन्य अनुड्ढांगिक मामलें को संचालित करने के अलावा किसी अन्य अथवा उपरोक्त समस्त मामलें को संचालित करने के उद्देष्य हेतु अन्य संगठनों की स्थापना तथा उसके अनुरक्षण हेतु प्राधिकृत है।